Opening Alaap — धीमा, खुला हुआ
सुबह उठ नहीं पाते हैंऽऽऽऽऽ…
सोए रह जाते हैंऽऽऽऽऽ…
जुर्म सिर्फ इतना हैऽऽऽऽऽ…
हाँऽऽऽ…
जुर्म सिर्फ इतना हैऽऽऽऽऽऽ…
रात भर मोबाइल चलाते हैंऽऽऽऽऽऽऽ!
मुखड़ा
सुबह उठ नहीं पाते हैं…
सोए रह जाते हैं…
जुर्म सिर्फ इतना है…
हाँऽऽऽ… इतना है…
रात भर मोबाइल चलाते हैं…
चलाते हैं… चलाते हैं…
रात भर मोबाइल चलाते हैं!
अंतरा 1
सोचा था बस एक रील…
फिर एक और…
एक से दूसरी आई…
दूसरी से तीसरी…
फिर रात कहाँ गई…
पता ही नहीं…
आँखें बोलीं — सो जाओ…
सो जाओ…
दिल बोला — थोड़ी देर…
थोड़ी देर…
थोड़ी देर के चक्कर में…
रात गई…
बात गई…
मुखड़ा
सुबह उठ नहीं पाते हैं…
सोए रह जाते हैं…
जुर्म सिर्फ इतना है…
हाँऽऽऽ… इतना है…
रात भर मोबाइल चलाते हैं…
चलाते हैं…
चलाते हैं…
अंतरा 2
अलार्म बजा…
बजता रहा…
आँख न खुली…
खुली नहीं…
हाथ बढ़ाया…
फोन दबाया…
बस पाँच मिनट…
फिर आँख लगी…
फिर नींद आई…
फिर सुबह हो गई…
सुबह हो गई…
माँ ने बोला — उठ जाओ…
उठ जाओ…
हमने बोला — बस आता हूँ…
बस आता हूँ…
फिर चादर ओढ़ के…
सो जाते हैं!
क़व्वाली हिस्सा
रात को जगाए कौन?
मोबाइल!
नींद भगाए कौन?
मोबाइल!
हाथ से छूटे?
ना!
दिल से छूटे?
ना!
सुबह पछताएँ?
हाँ!
हाय हाय…
फिर भी ना छोड़ें!
अंतरा 3
हर रात कहते हैं…
आज जल्दी सोएँगे…
जल्दी सोएँगे…
फोन दूर रख देंगे…
दूर रख देंगे…
रात हुई…
फोन आया…
फिर दिल बहकाया…
एक वीडियो…
फिर एक और…
फिर वक्त निकल गया…
वक्त निकल गया…
नींद बुलाती रह गई…
हमसे रूठ गई…
और सुबह फिर छूट गई…
Build-up
बस पाँच मिनट!
पाँच मिनट!
बस एक रील!
एक रील!
बस आख़िरी वीडियो!
आख़िरी वीडियो!
फिर मोबाइल रख देंगे?
रख देंगे!
सच?
सच!
फिर?
फिर एक और!
हाय हाय…
फिर एक और!
Final Hook
सुबह उठ नहीं पाते हैंऽऽऽऽऽ…
सोए रह जाते हैंऽऽऽऽऽ…
जुर्म सिर्फ इतना हैऽऽऽऽऽ…
हाँऽऽऽ… इतना है!
हाँ… जुर्म सिर्फ इतना हैऽऽऽऽऽऽ…
सिर्फ इतना है!
रात भर मोबाइल चलाते हैंऽऽऽऽऽऽऽ!
चलाते हैं!
चलाते हैं!
रात भर मोबाइल चलाते हैं!
Outro
कल से जल्दी सोएँगे…
हाँ जी… जल्दी सोएँगे…
फोन दूर रखेंगे…
हाँ जी… दूर रखेंगे…
पक्का?
पक्का!
रात को?
फिर मोबाइल उठाएँगे! 😄
हाय हाय…
क्या करें… क्या करें…
जुर्म सिर्फ इतना हैऽऽऽऽऽऽऽ…
इतना है… इतना है…
रात भर मोबाइल चलाते हैंऽऽऽऽऽ!
रात भर मोबाइल चलाते हैं!