Hook
कैसे भुला दूँ तुझको… दिल जलता ही रहा…
तेरे बिना ये जीवन… बस कटता ही रहा…
💔 तेरी हँसी की गूंज… अब भी सताती है…
हर धड़कन में बस तू… क्यों याद आती है…
Verse 1
भीगी सी रातों में… नाम तेरा लिखता हूँ…
खुद से ही बातें करके… खुद को ही दिखता हूँ…
तू पास थी जब तक… दुनिया हसीन थी…
अब हर खुशी अधूरी… हर सांस ग़मीन है…
Hook Repeat
कैसे भुला दूँ तुझको… दिल जलता ही रहा…
तेरे बिना ये जीवन… बस कटता ही रहा…
Verse 2
तेरे बिना ये दिल अब… पत्थर सा हो गया…
रोते-रोते अंदर से… बिखर सा हो गया…
रास्ते वही लेकिन… मंज़िल नहीं रही…
तू जो गई तो मेरी… दुनिया नहीं रही…
दिल चिल्लाए… तेरा नाम…
रात जलाए… मेरा जहाँ…
तू नहीं… फिर भी क्यों…
दिल तुझे ही पुकारे…
Bridge
अगर तू लौट आए… सब कुछ बदल जाए…
टूटा हुआ ये दिल… फिर से संभल जाए…
Final Hook
कैसे भुला दूँ तुझको… दिल मानता ही नहीं…
तेरी हँसी के बिना… साँस आती ही नहीं…