आलाप
ओऽऽ…
हाय मेरी माटी रेऽऽ…
ओ मेरी धरती माँऽऽ…
तेरे चरणां विच सिर रख के,
जीना भी तेरा… मरना भी तेरा…
मुखड़ा
ये मिट्टी फिर नहीं मिलनी,
ये माटी फिर नहीं आनी,
जिस धरती ने जन्म दिया है,
उस पर जान लुटानी।
ओ मेरी धरती माँऽऽ,
तू सबसे प्यारी माँऽऽ,
तेरे रंग में रंग के जीना,
तेरे नाम की कहानी।
अंतरा 1
तेरे खेतों की खुशबू लेकर,
बचपन मेरा खेला,
तेरी गोदी में सीखा मैंने,
जीवन का हर मेला।
तेरी नदियाँ गीत सुनाएँ,
तेरे पंछी गाएँ,
तेरी मिट्टी माथे लगाकर,
हम सरहद तक जाएँ।
जो साँस मिली है तेरी हवा से,
वो साँस तेरे नाम,
तेरे खातिर हँसते-हँसते,
कर देंगे कुर्बान।
मुखड़ा — बड़ा कोरस
ये मिट्टी फिर नहीं मिलनी,
ये माटी फिर नहीं आनी,
जिस धरती ने जन्म दिया है,
उस पर जान लुटानी।
ओ मेरी धरती माँऽऽ,
तू सबसे प्यारी माँऽऽ,
तेरे रंग में रंग के जीना,
तेरे नाम की कहानी।
अंतरा 2
माँ की आँखों का वो पानी,
वीर के माथे का तिलक,
सीने में तिरंगा लेकर,
चल पड़े वो बेखौफ।
ना दौलत की चाहत कोई,
ना दुनिया का मान,
माँ भारती की आन रहे बस,
यही हमारा अरमान।
जहाँ तिरंगा लहराए,
वहीं हमारा घर है,
भारत माँ के चरणों में ही,
मेरा सारा सर है।
ब्रिज — धीरे से शुरू, फिर उठान
अगर पुकारे मेरी धरती,
दौड़ के मैं आऊँगा,
माँ की लाज बचाने खातिर,
हँसकर जान लुटाऊँगा।
आज नहीं तो कल ये दुनिया,
मेरी माटी गाएगी,
भारत माँ की जय के संग-संग,
हर धड़कन मुस्काएगी।
अंतिम कोरस — बहुत बड़ा
ये मिट्टी फिर नहीं मिलनी,
ये माटी फिर नहीं आनी,
जिस धरती ने जन्म दिया है,
उस पर जान लुटानी!
ओ मेरी धरती माँऽऽऽ,
तू सबसे प्यारी माँऽऽऽ,
तेरे रंग में रंग के जीना,
तेरे नाम की कहानी!
भारत माँ की जय!
भारत माँ की जय!
भारत माँ की जय!
ओऽऽ मेरी माटी रेऽऽ…
तू ही मेरी शान…
तू ही मेरी जान…
तू ही मेरा हिंदुस्तान!