Ude Jab Jab Gaura Ji Ki Chunri — cover art
शिव भजन

Ude Jab Jab Gaura Ji Ki Chunri

Rooh Music Studio · गीत के बोल

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सावन की रुत आई रे,
कैलाश पे बहार छाई रे,
गौरा सजीं सोलह श्रृंगार में,
भोले खड़े निहारें रे।

अरे भोले खड़े निहारें रे,
गौरा हँसे मुस्काए रे।

उड़े जब-जब गौरा जी की चुनरी,
भोले जी मुस्काएँ रे,
कैलाश की गलियों में जैसे,
फूलों के मेले छाएँ रे।

अरे गौरा, ओ गौरा,
क्या रंग जमाया रे,
तुमको देखा भोले ने तो,
डमरू बजता जाए रे।

उड़े जब-जब गौरा जी की चुनरी,
भोले जी मुस्काएँ रे।

गौरा बोलीं, काहे निहारो,
ऐसे मुझे चुपचाप रे,
भोले बोले, क्या बतलाऊँ,
तुम ही मेरा जाप रे।

गौरा हँसके आँखें झुकाएँ,
भोले मन हरषाएँ रे,
गौरा की एक मुस्कान पे,
कैलाश भी झूमे जाए रे।

उड़े जब-जब गौरा जी की चुनरी,
भोले जी मुस्काएँ रे,
कैलाश की गलियों में जैसे,
फूलों के मेले छाएँ रे।

सावन के झूले पड़ गए,
गौरा झूला झूलें रे,
भोले दूर खड़े मुस्काएँ,
नैनों से रस घोलें रे।

गौरा बोले, आओ भोले,
झूला संग झुलाएँ रे,
भोला बोले, तुम संग झूलूँ,
तो बादल भी शरमाएँ रे।

उड़े जब-जब गौरा जी की चुनरी,
भोले जी मुस्काएँ रे।

भोले मेरे भोले,
काहे ऐसे हँसते हो?
गौरा मेरी गौरा,
तुम जो सामने रहते हो।

बातों में तुम जीत गए जी,
तुमसे हारना भाए रे।

उड़े जब-जब गौरा जी की चुनरी,
भोले जी मुस्काएँ रे,
डमरू बोले डम-डम-डम-डम,
भक्त भी झूमते जाएँ रे।

नंदी आगे-आगे डोले,
गण सारे ताली बजाएँ रे,
शिव-गौरा की प्यारी जोड़ी,
सबके मन को भाएँ रे।

फूल बरसें कैलाश की छत से,
बादल गीत सुनाएँ रे,
शिव के संग जब गौरा नाचे,
तीनों लोक झूम जाएँ रे।

ना धन माँगे, ना महल माँगे,
ना माँगे कोई ताज रे,
भोले को बस गौरा प्यारी,
गौरा को भोले आज रे।

एक दूजे में प्रेम समाया,
एक दूजे का मान रे,
शिव बिना शक्ति अधूरी,
शक्ति बिना शिव कहाँ रे।

उड़े जब-जब गौरा जी की चुनरी,
भोले जी मुस्काएँ रे,
कैलाश की गलियों में जैसे,
फूलों के मेले छाएँ रे।

डमरू बाजे डम-डम-डम-डम,
ढोलक बाजे धा-धा रे,
गौरा संग जब भोला नाचे,
झूमे सारा कैलाश रे।

उड़े जब-जब गौरा जी की चुनरी,
भोले जी मुस्काएँ रे,
शिव-गौरा के रंग में रंगकर,
भक्त भी झूमते जाएँ रे।

अरे झूमो रे,
अरे नाचो रे,
हर हर महादेव!

गौरा शंकर की जय,
हर हर महादेव,
गौरा शंकर की जय।