हाआआ… आआआ…
तू ही तू… तू ही तू…
मेरी रूह में बस गया तेरा ही नाम…
तू मेरी आन है… तू मेरी शान है…
तू मेरा ईमान है… तू ही मेरा जहान है…
तू मेरी पहचान है… तू मेरी जान है…
तू ही मेरी दुआओं का अरमान है…
तू ही मेहमान है दिल के दरबार में…
तू ही तो रहता है हर एक ख्याल में…
तू मेरी आन है… तू मेरी शान है…
तू मेरा ईमान है… तू ही मेरा जहान है…
तेरे बिना ये दिल कहीं लगता नहीं…
तेरे सिवा कोई अपना दिखता नहीं…
हर एक सांस में बस तू ही बसा…
तेरे बिना ये जहां सच्चा लगता नहीं…
तू ही सुकून… तू ही जुनून…
तू ही मेरा खुदा सा नूर…
तेरे बिना अधूरा मैं…
तू ही मेरा गुरूर…
तू मेरी आन है… तू मेरी शान है…
तू मेरा ईमान है… तू ही मेरा जहान है…
तू मेरी पहचान है… तू मेरी जान है…
तू ही मेरी दुआओं का अरमान है…
तेरे इश्क में जो डूबा वो पार उतर गया…
तेरा नाम जो लिया वो खुद से संवर गया…
दर पे तेरे जो आया खाली कभी ना गया…
तू ही तू… तू ही तू…
हर जगह बस तू ही तू…
तू ही मेरा ईमान है…
तू ही मेरा जहान है…
तू ही मेरी हर खुशी…
तू ही मेरी पहचान है…
तू मेरी आन है…
तू मेरी शान है…
तू ही मेरा जहान है…